अध्याय 3 अनपेक्षित मुठभेड़

"मुझे बहुत अफ़सोस है।" एस्ट्रिड ने सिर झुकाए रखा, चेहरा सुर्ख़ लाल हो गया था। वह बुदबुदाते हुए माफ़ी मांगकर वहाँ से झटपट भाग निकली।

साइलस ने उसे तेज़ी से दूर जाते देखा—मन में झुंझलाहट भी थी और हल्की-सी हँसी भी।

"साइलस! कहाँ खोए हो? अंदर आओ," जैक विल्सन ने आवाज़ दी। वह अपने केबिन से निकलते हुए आया और दोस्त को पास बुलाया।

"रुको। पहले मुझे तुम्हें मेरे लिए एक काम करना है," साइलस ने कहा, अपनी जगह ज्यों का त्यों खड़े रहते हुए।

जैक ने हैरानी से उसे देखा। "क्या काम है?"

साइलस थोड़ा झुका, आवाज़ धीमी कर ली। सुनते ही जैक के चेहरे पर शरारती-सी मुस्कान फैल गई।

"ज़िंदगी भी न, बड़ी नाइंसाफ़ है। वो औरत ज़्यादा सेक्स की वजह से आई थी, और तुम लंबे संयम से परेशान हो। ध्यान रखना—इच्छाओं को दबाते रहोगे तो गड़बड़ भी हो सकती है।" बोलते-बोलते जैक के चेहरे पर अचानक समझ उतर आई। वह साइलस को डर के मारे घूरने लगा। "रुको! उस मरीज़ से तुम्हारा क्या रिश्ता है? तुम्हें उसकी जानकारी क्यों चाहिए?"

साइलस हमेशा की तरह शांत रहा, लहजा सहज। "हाँ, वही जो तुम सोच रहे हो। अपनी कल्पना को खुली छूट दे दो।"

उधर, एस्ट्रिड आखिरकार अपने अपार्टमेंट लौट आई थी। पूरे रास्ते वह मन-ही-मन साइलस को कोसती रही। वह इतना बेरुखा कैसे हो सकता है? कौन-सी औरत इतनी तीव्रता सह पाएगी?

अंदर आते ही उसकी नज़र ऑलिवर की भेजी नई ड्रेस पर पड़ी। उसने उसे नज़रअंदाज़ किया और सीधे अपने कमरे में चली गई। ऑलिवर कभी कंजूसी नहीं करता था; वह हर मांग पर खुलकर देता। पहले एस्ट्रिड को लगता था, यह उसके प्यार का सबूत है। अब उसे समझ आ गया था—यह भी उसके बड़े और चालाक झूठ का ही एक तरीका था।

अगले दिन ऑलिवर का फोन आया कि उसका ड्राइवर रास्ते में है। उसे नाराज़ न करने के लिए वह मीठी बातें करने लगा। "एस्ट्रिड, आज रात मॉन्टगोमेरी परिवार के सब लोग होंगे। मैं अभी निकल नहीं सकता, लेकिन तुम पहुँचते ही मेरा पूरा ध्यान तुम्हीं पर होगा।"

एस्ट्रिड ने घिन दबाते हुए कॉल काट दिया। ऑलिवर उसे चिढ़ाता था, फिर भी वह समारोह ऊँचे तबके में रिश्ते बनाने का अच्छा मौका था। उसने बर्फ़-सी सफेद गाउन पहन लिया और बालों को सादे-से बन में बाँध लिया।

स्थल पर पहुँचते ही प्रवेश द्वार के पास महँगी गाड़ियाँ कतार में खड़ी थीं। ऑलिवर सड़क किनारे इंतज़ार कर रहा था। उसकी कार देखते ही वह आगे बढ़ा, ध्यान से दरवाज़ा खोला और अपना हाथ बढ़ाया। अपने असली भाव छिपाते हुए एस्ट्रिड ने हल्के से अपना हाथ उसके बाजू पर रख दिया।

"मैं तुम्हें अपने अंकल से मिलवाऊँगा। मेरे कुछ प्रोजेक्ट्स को उनकी मंज़ूरी चाहिए, और वे ऐसे आयोजनों में कम ही आते हैं। तुम्हें अच्छा प्रभाव डालना होगा," ऑलिवर ने धीमे से कहा, इस बात से बेख़बर कि भीड़ की नज़रें असल में सिर्फ़ एस्ट्रिड पर टिकी थीं।

थोड़ी देर में ऑलिवर उसे एक शांत हिस्से में ले गया, जहाँ वे साइलस के किसी बातचीत से फुर्सत पाने का इंतज़ार करने लगे, फिर पास गए।

"साइलस, ये मेरी गर्लफ्रेंड—एस्ट्रिड है," ऑलिवर ने गर्व से कहा। "एस्ट्रिड, ये मेरे अंकल—साइलस मॉन्टगोमेरी हैं।"

"शुभ संध्या, मिस्टर मॉन्टगोमेरी," एस्ट्रिड ने शालीनता से कहा—चेहरा साफ़, और आवाज़ स्थिर।

साइलस ने गहरा बैंगनी सूट पहन रखा था और सफ़ेद शर्ट का कॉलर खुला हुआ था। उनके जुड़े हुए हाथों पर उसकी बर्फ़-सी नज़र फिरती ही उसके शैम्पेन के गिलास पर पकड़ अनजाने में कस गई। उसने बस रूखे-से सिर हिलाकर जवाब दिया—साफ़ था कि बात करने का कोई इरादा नहीं—और तुरंत वहाँ से चला गया।

ओलिवर अपने चाचा को जाते हुए उलझन से देखता रहा। क्या उसने उन्हें नाराज़ कर दिया था?

“मुझे लेडीज़ रूम जाना है,” एस्ट्रिड ने कहा, और इसी बहाने अपना हाथ छुड़ाने का मौका पकड़ लिया।

भीड़ के बीच से निकलते हुए एस्ट्रिड मन ही मन हिसाब लगा रही थी कि किन जान-पहचान वालों के पास जाना फ़ायदेमंद रहेगा। वॉशरूम में दाख़िल होते तक भी वह अपनी नेटवर्किंग की रणनीति सोच ही रही थी।

उसके पीछे दरवाज़ा ज़ोर से धड़ाम करके बंद हुआ।

एस्ट्रिड मुड़ी तो सामने वही गहरे बैंगनी रंग का प्रभावशाली शख़्स खड़ा था। उसके भीतर खतरे की घंटियाँ बज उठीं।

“मिस्टर मॉन्टगोमेरी, ये लेडीज़ रूम है। आप गलत जगह आ गए हैं,” उसने चेतावनी दी।

साइलस के होंठ हल्का-सा तिरछे हुए। “क्या बात है? तुम भूल गईं मैं कौन हूँ?” उसकी आवाज़ में नाराज़गी का दबा हुआ सुर था।

“क्या मुझे आपको जानना चाहिए?” एस्ट्रिड ने ठंडेपन से पलटकर कहा। मॉन्टगोमेरी खानदान के हर इंसान में ये ऊँचा-नीचा वाला रवैया क्यों होता है?

“मैं तुम्हें एक मौका दे रहा हूँ—यहाँ से निकल जाओ। ये मत समझना कि तुम ओलिवर की… वजह से मैं तुम्हें बेहूदा साबित नहीं कर सकता,” एस्ट्रिड ने कहा और आईने की तरफ़ मुड़ गई।

वह बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि जलते हुए हाथों ने उसकी कमर जकड़ ली। साइलस ने उसे आसानी से उठाकर काउंटर पर बिठा दिया और दोनों तरफ़ से उसे घेरकर दबोच लिया।

“मैं तुम्हें याद दिला दूँ कि मैं ठीक-ठीक कौन हूँ,” वह धीमे से बुदबुदाया।

“हरामज़ादे! छोड़ो मुझे!” एस्ट्रिड चीखी, फोन की ओर हाथ बढ़ाते हुए।

वह नंबर मिलाती, उससे पहले ही फोन बज उठा—स्क्रीन पर ओलिवर का नाम चमक रहा था।

साइलस के भीतर कुछ टूट-सा गया। एक झटके में एस्ट्रिड ने कपड़े के फटने की आवाज़ सुनी और अचानक ठंडक-सी महसूस की।

“तुम… जानवर! तुम्हें ज़रा भी अकल है तुम क्या कर रहे हो?” एस्ट्रिड ने फुसफुसाकर कहा—गुस्से और शर्म से लाल।

“तुम्हें पता है, तुम अपनी दवा अस्पताल में छोड़ आई थीं?” साइलस ने खाली हाथ से मरहम की एक ट्यूब निकाल ली।

एस्ट्रिड का मुँह खुला रह गया। उसकी शर्म और बढ़ गई, और उसने पैर उठाकर उसे लात मारनी चाही। साइलस ने आसानी से उसकी एड़ी पकड़ ली। दूसरे हाथ से उसने मरहम निकालकर उँगलियों पर लिया। एस्ट्रिड कुछ समझ पाती, उससे पहले ही वह उसकी ड्रेस के अंदर हाथ ले गया।

एक बिजली-सी सनसनाहट उसके बदन में दौड़ गई, और वह काँप उठी। साइलस झुक आया, नज़रें उसी पर टिकी हुईं। उसने लगाए गए मरहम पर हल्की-सी फूँक मार दी।

“चुप रहो। मैं तुम्हारी दवा लगा रहा हूँ। मुझे मजबूर मत करो कि यहीं…,” उसकी आवाज़ अचानक भारी और खुरदुरी हो गई।

एस्ट्रिड का दिमाग़ सुन्न पड़ गया। उलझे हुए ख़याल तब साफ़ हुए जब उसे कुछ सख़्त-सा अपने ऊपर दबता महसूस हुआ।

“छोड़ो मुझे! ओलिवर फोन कर रहा है!” वह घबराकर बोली।

“ओलिवर?” साइलस का चेहरा और स्याह पड़ गया—बेकाबू, गुस्से से भरा। सज़ा देने के अंदाज़ में उसने अपनी उँगलियों की गाँठें और ज़ोर से दबा दीं।

एस्ट्रिड ने झट से जाँघें भींच लीं, टूटी हुई-सी कराह मुश्किल से गले में दबाई। “तुम बिल्कुल बेमतलब के हो!”

“एस्ट्रिड?” बाहर से अचानक ओलिवर की आवाज़ आई। “क्या तुम ही बोल रही हो?”

एस्ट्रिड घबराकर ऊपर देखती रह गई, और उसने अपने होंठ कसकर दाँतों के बीच दबा लिए।

“इतनी देर क्यों लग रही है? जवाब नहीं दोगी तो मैं अंदर आ रहा हूँ।”

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